तीन से पांच जजों की हुई बेंच, क्या चुनाव से पहले आएगा राम मंदिर पर फैसला?

Published On: January 10, 2019 at 10:33 AM 0 Comments R Baranwal

अयोध्या विवाद मामले की सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जिस तरह से 5 जजों के नए बेंच का गठन किया है, इससे साफ जाहिर है कि इस मामले को कोर्ट साधारण भूमि विवाद की तरह नहीं देख रहा है. ऐसे में क्या सालों पुराने इस मामले का फैसला 2019 के चुनाव से पहले आएगा या फिर अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

अयोध्या राम मंदिर-बाबरी मस्जिद की जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे विवाद मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की संविधान पीठ गुरुवार को करेगी. जबकि इससे पहले तीन जजों की बेंच इस मामले को देख रही थी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने जिस तरह से नए बेंच का गठन किया है, इससे साफ जाहिर है कि इस मामले को कोर्ट साधारण भूमि विवाद की तरह नहीं देख रहा है. ऐसे में क्या सालों पुराने इस मामले का फैसला 2019 के चुनाव से पहले आएगा या फिर अभी और इंतजार करना पड़ेगा?

अयोध्या मामले सुनवाई के लिए 5 जजों की नई संविधान पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई करेंगे. इसके अलावा संविधान पीठ में जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ शामिल हैं. वरिष्ठता और उम्र के हिसाब से पीठ में शामिल चारों जज आने वाले समय में चीफ जस्टिस बनने की लाइन में है.

बता दें कि अयोध्या मामला 1950 से कोर्ट में है, लेकिन अब संविधान पीठ के गठन के बाद फैसले की उम्मीद जागी है. कानून के जानकारों का कहना है कि इस मामले को साधारण भूमि विवाद की जगह राष्ट्रीय मसले के तौर पर देखा जाएगा. ये मुद्दा धर्म से जुड़ा हुआ तो इसकी संवैधानिक पहलुओं की समीक्षा भी हो सकती है. कोर्ट सुनवाई में तय हो जाएगा कि मामले को कब से और किस तरह सुना जाएगा.

अयोध्या मामले के मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब ने कहा है कि विवादित जमीन केस की सुनवाई करने वाले 5 जजों की पीठ में एक मुस्लिम जज भी होना चाहिए था. हालांकि मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट धर्म के लिहाज से फैसला नहीं देता है. संविधान और सूबतों के आधार पर जज फैसला देते हैं. इसीलिए यह मायने नहीं रखता है कि बेंच (पीठ) में किस धर्म को मानने वाले जज शामिल हैं.

इकबाल अंसारी ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि इस मामले में जल्द से जल्द फैसला आए, लेकिन फैसला देना कोर्ट का काम है. ऐसे में कोर्ट जब भी और जो निर्णय देगा उसे हम स्वीकार करेंगे. हमारे पास सबूत हैं इसीलिए 70 साल से ये मामला चल रहा है.

राम जन्मभूमि न्यास समिति के वरिष्ठ सदस्य और पूर्व सांसद रामविलास वेदांती ने कहा कि संविधान पीठ में शामिल जज को धर्म के चस्में से नहीं देखा जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के जजों को एक अरब हिंदुओं की भावना का ख्याल रखना चाहिए और अब इस मामले में इंतेजार खत्म होना चाहिए.

वहीं, कानून के जानकारों की राय है कि मामले की सुनवाई तेजी से होगी, 5 जजों की बेंच इसलिए भी बनी है ताकि किसी पक्ष के एतराज की कोई गुंजाइश न बचे. हाईकोर्ट ज़्यादातर सवालों के जवाब दे चुका है. हाईकोर्ट ने 3 महीने में सुनवाई करके फैसला दे दिया था. ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट में ज़्यादा समय नहीं लगना चाहिए.

Source: https://aajtak.intoday.in/story/ayodhya-ram-mandir-babri-masjid-supreme-court-5th-justices-bench-2019-election-tpt-1-1053282.html

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  • Slide 1
  • Slide 2
Copyright © 2021 Gopalganjnews. All Rights Reserved.
Powered by SBeta TechnologyTM
WP2Social Auto Publish Powered By : XYZScripts.com