बिजली कंपनियों के भंवर से निकलने की बढ़ी उम्मीद

Published On: January 25, 2019 at 10:54 AM 0 Comments R Baranwal

नई दिल्ली (जयप्रकाश रंजन)। रेल व कोयला मंत्री पीयूष गोयल को वित्त मंत्रालय का भी प्रभार मिलने के बाद देश में कई वजहों से भंवर में फंसी 34 बिजली संयंत्रों के मामले पर अब जल्द फैसला होने की संभावना बन गई है। इन संयंत्रों से जुड़े मामलों को सुलझाने के लिए गठित मंत्रिसमूह (जीओएम) की बैठक अरुण जेटली की अनुपस्थिति के चलते नहीं हो पा रही थी। लेकिन अब इस मामले पर न सिर्फ जीओएम की अगली बैठक जल्द होने के आसार हैं बल्कि अधिकारी जल्द नतीजा निकलने की भी उम्मीद जता रहे हैं। इन परियोजनाओं पर जल्द फैसला ना सिर्फ देश की कई बिजली कंपनियों की माली हालत सुधारेगा बल्कि देश के बैंकिंग सेक्टर में फंसे हजारों करोड़ रुपये के कर्ज की वसूली का रास्ता भी साफ करेगा।

तकरीबन 40 हजार मेगावाट क्षमता की इन बिजली संयंत्रों का मामला पिछले तीन वर्षो से फंसा हुआ है और इनमें तकरीबन सवा दो लाख करोड़ रुपये का बैंकिंग कर्ज एनपीए में तब्दील हो चुका है। रिजर्व बैंक की तरफ से 12 फरवरी, 2018 को एनपीए संबंधी जो नए नियम आए थे उससे इनमें से कई संयंत्रों को दिवालिया घोषित करते हुए उनकी परिसंपत्तियों को बिक्री की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस बीच केंद्र सरकार ने कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी जिसे मामले को कोर्ट से बाहर निबटाने का फॉमरूला निकालने पर सुझाव देने कहा गया था। यह समिति अपना सुझाव दे चुकी है और इस पर फैसला करने के लिए अरुण जेटली की अध्यक्षता में जीओएम का गठन हुआ था। इसकी एक ही बैठक हो पाई थी।

Source: https://www.jagran.com/business/biz-issue-of-34-power-plants-has-now-become-a-possibility-of-a-decision-soon-18888708.html

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