भागती जिन्दगी के दुष्परिणाम

Published On: February 27, 2018 at 7:49 AM 0 Comments R Baranwal

चिकित्सा लेने वाले लोगों पर किए गए एक सर्वेक्षण से पता चलता है कि परामर्श लेने वाले ५० प्रतिशत से अधिक लोग या तो यौन संबंधी परेशानियों के बारे में सलाह लेते हैं या मानसिक समस्याओं को लेकर डॉक्टरों के पास जाते हैं।

एक निजी एजेंसी द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में इसकी जानकारी मिली है। सर्वेक्षण में बात सामने आई है कि यौन संबंधी (३२ प्रतिशत), मानसिक रोग (२१ प्रतिशत), जीवनशैली से जुड़े (१५ प्रतिशत), आहार और पोषण संबंधी (१२ फीसदी), महिलाओं की सेहत से जुड़े (११ प्रतिशत), त्वचा संबंधी (५ प्रतिशत) और बच्चों की सेहत से जुड़े (४ प्रतिशत) मामले आते हैं। इसके अनुसार इस साल एक जनवरी से १२ महीने की अवधि में करीब पांच करोड़ लोगों से बातचीत के विश्लेषण के बाद ये आंकड़े जारी किये।

एजेसी का कहना है कि ‘‘आजकल लोग ऐसे मामलों में अपेक्षाकृत अधिक मुखर होकर बातचीत कर लेते हैं जिन्हें लेकर पहले सार्वजनिक चर्चा नहीं होती थी, लेकिन आज भी पूरी तरह खुलकर बातचीत नहीं करने की प्रवृत्ति देश की वास्तविक स्वास्थ्य संबंधी तस्वीर को बिगाड़ती है।’’ आगे कहा कि, ‘‘हमने काफी आंकड़े जुटाये हैं जो विभिन्न लिंग, आयु समूहों और भौगोलिक स्थितियों के संदर्भ में स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।’’

पिछले सेंसेक्स रिपोर्ट के अनुसार भारत के ३० फिसदी युवाओं में यौन संबंधी विकार है और वे पिता बनने के काबिल नहीं हैं। जबकि बालिकाओं में यह दर २५ फिसदी है। यह रिपोर्ट सत्यापित करता है कि भारत में धीरे – धीरे नपुंसकता भयावह रूप से बढ़ती जा रही है। जिसका परिणाम भारत की संस्कृति पर पड़ सकती है। इसके कारणों में कई वस्तुओं के नाम जानकार गिना रहे हैं। जिनमें से मुख्य रूप से आयोडिन नमक और रात्रि में कार्य करना है।

१) आयोडिन नमक – जब तक भारत के लोग सेंधा, झाील या फिर काला नमक खाते थे तब तक भारत में रक्तचाप, बांझपन आदि कई प्रकार की बिमारियां नहीं थी। लेकिन जैसे ही १९८० के दशक में समुद्री नमक आया और बाद में उसे रिफाईन किया जाने लगा वैसी ही ये बिमारियां आने लगी। इसमें सरकार ने सभी को मजबूर भी किया। नमक वंâपनियों ने नमक में से उसकी गुणवत्तता को निकालकर ड्रग्स वंâपनियों को बेचा और नमक की सिट्ठी में आयोडिन मिलाकर बेचा। इससे भारत के लोगों में आयोडिन की अधिकता और कई प्रकार के तत्वों की कमी आई। जिसके कारण रोगों की संख्या बढ़ने लगी।

२) रात्रि में कार्य करना – रात्रि में कार्य करने वाले पुरुष या स्त्री में नपुंसकता के रोग बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहा है। यह जग – जाहीर है। क्योंकि पुरुषों के शरीर में शुक्र का निर्माण और स्त्री के शरीर में अण्डाणुओं का निर्माण तभी होता है जब रात्रि में हम आराम की अवस्था में रहते हैं। शरीर जब सोया रहता है तभी इसका निर्माण कार्य होता है। ऐसे में रात्रि में कार्य करने वाले पुरुष के शरीर में शुक्र और नारी के शरीर में अन्डे तौयार होने की क्रिय असंतुलित हो जात्ी है। जिसके कारण वे माँ – पिता नहीं बन सकते।

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